Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 121, Verse 58
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 121, verse 58 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 121 · श्लोक 58
संस्कृत श्लोक
नाभिवाञ्छति नो द्वेष्टि देहे किंचित्क्वचित्पुमान् ।
स्वस्थस्तिष्ठ निराशङ्कं देहवृत्तिषु मा पत ॥ ५८ ॥
हिन्दी अर्थ
आत्मा किसी देह में न तो किसी की इच्छा करता है ओर न किसी से द्वेष करता है;
इसलिए आप स्वस्थ होकर आशंकाहीन हो स्थित होइये। देह की वृत्तियों में मत गिरिये