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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 121, Verse 62

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 121, verse 62 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 121 · श्लोक 62

संस्कृत श्लोक

प्रेक्ष्यमाणं न यत्किंचित्तेन यत्क्रियते क्वचित् । कृतं भवति तन्नेति मत्वा चित्तातिगो भवेत् ॥ ६२ ॥

हिन्दी अर्थ

जब चित्त असत्‌ है, तो उसके कार्य युतरां असत्य हैं, ऐसा कहते हैं। विचार करके देखने पर जो कुछ नहीं है, उसके द्वारा जो कुछ करते हैं वह भी कृत नहीं है, ऐसा मानकर चित्त से परे होइये