Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 122, Verse 12
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 122, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 122 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
तनुभावितमनस्कस्तेन योगभूमिकां भावनामधिरूढः ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
अत्यन्त सूक्ष्म ब्रह्म में जिसने अपने चित्त को एकरस कर दिया है,
ऐसा योगी उसके द्वारा पदार्थाभावनी नाम की योगभूमिका में आरूढ होता है