Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 122, Verse 15
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 122, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 122 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
त्वयापि राघव ज्ञातं ज्ञातव्यमखिलान्तरम् ।
ननु ते सर्वकार्येभ्यो वासना तनुतां गता ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
आप तो अत्यन्त शुद्ध चित्तवाले हैं, इसलिए आपने दूसरी भूमिका में ही अपने ही विचार
से प्रत्यगात्मतत्त्व का ज्ञान प्राप्त कर लिया है, इस आशय से कहते हैं।
हे श्रीरामचन्द्रजी, आपने सबका अन्तर्यामी ज्ञातव्य तत्त्व जान लिया है, क्योंकि आपकी
वासना सम्पूर्ण कार्यो से तनुता को प्राप्त हो गई है