Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 122, Verse 4
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 122, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 122 · श्लोक 4
संस्कृत श्लोक
तदासौ शुभेच्छाभिधां विवेकभुवमापतितो भवति ॥ ४ ॥
हिन्दी अर्थ
तब वह पूर्वोक्त शुभेच्छा नाम की
ज्ञानभूमिका में अवतीर्ण होता है