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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 122, Verse 5

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 122, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 122 · श्लोक 5

संस्कृत श्लोक

ततो विवेकवशतो विचारणायाम् ॥ ५ ॥

हिन्दी अर्थ

शुभेच्छा नाम की ज्ञानभूमिका में विजय प्राप्त करने से दूसरी भूमिका की प्राप्ति दशाति हैं । तदुपरान्त विवेकवश विचारणा नाम की ज्ञानभूमिका में आता है