Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 122, Verse 8
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 122, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 122 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
यदैव योगिनः सम्यग्ज्ञानोदयस्तदैव सत्त्वापत्तिः ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
चौथी भूमिका के अवतरण का प्रकार कहते हैं।
जभी योगी के सम्यग् ज्ञान का उदय होता है, तभी शुद्ध, सत्य आत्मा में स्थितिरूप
चौथी ज्ञानभूमिका सत्त्वापत्ति प्राप्त होती है