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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 122, Verse 9

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 122, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 122 · श्लोक 9

संस्कृत श्लोक

तद्वशाद्वासना तनुतां गता यदा तदैवासावसंसक्त इत्युच्यते कर्मफलेन न बध्यत इति ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

उसके कारण जब वासना सूक्ष्मता को प्राप्त हो जाती है, तभी योगी असंसक्त कहा जाता है, कर्मफल से बन्धन में नहीं पड़ता है