Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 15, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 15, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 15 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
तस्मान्न किंचिदुत्पन्नं जगदादीह दृश्यकम् ।
अनाख्यमनभिव्यक्तं यथास्थितमवस्थितम् ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
इसलिए यहाँ जगत्
आदि कुछ भी दृश्य उत्पन्न नहीं हुआ हे, नाम और रूप से रहित चिद्रूप ब्रह्म ज्यों-का-त्यों
(स्वरूप में किसी प्रकार के विकार से रहित) स्थित है