Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 16, Verse 24
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 16, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 16 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
विप्रा ऊचुः ।
तपोजपयमैर्देवि समस्ताः सिद्धसिद्धयः ।
संप्राप्यन्तेऽमरत्वं तु न कदाचन लभ्यते ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
ब्राह्मणों ने कहा : देवि, तप, जप, यम-नियमों से
सिद्धों की सम्पूर्ण सिद्धियाँ प्राप्त हो सकती है, पर अमरत्व कदापि प्राप्त नहीं हो सकता