Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 18, Verse 15
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 18, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 18 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
श्रीदेव्युवाच ।
अकृत्रिमत्वं सर्गस्य कीदृशं वद सुन्दरि ।
कीदृशं कृत्रिमत्वं स्याद्यथावत्कथयेति मे ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीदेवीजी ने कहा : हे सुन्दरी, सृष्टि की अकृत्रिमता केसी है और कृत्रिमता
कैसी है, यह मुझसे भलीभाँति कहो