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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 2, Verse 9

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 2, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 2 · श्लोक 9

संस्कृत श्लोक

अथागत्य यमं मृत्युरपृच्छत्संशयच्छिदम् । किमित्यहं न शक्नोमि भोक्तुमाकाशजं विभो ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

तदुपरान्त मृत्यु ने संशय को दूर करनेवाले यमराज के पास जाकर उनसे पूछा : हे विभो, मैं आकाशज ब्राह्मण को खाने के लिए क्यों समर्थ नहीं हूँ