Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 20, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 20, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 20 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
विभिद्यमानामन्येन स्थापयाम्यहमेव याम् ।
मर्यादां तां मया भिन्नां कोऽपरः पालयिष्यति ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
दूसरों के द्वारा भिद्यमान (उल्लंघन किये जा रहे)
जिस (वेदमर्यादा) का मैं संस्थापन करती हूँ, यदि उसका मैं ही उल्लंघन करूँ तो उसका
पालन दूसरा कौन करेगा २