Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 20, Verse 15
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 20, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 20 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
सग्रामद्विजजीवात्मा तस्मिन्नेव स्वसद्मनि ।
व्योम्न्येवेदं महाराष्ट्रं व्योमात्मैव प्रपश्यति ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
राजा बनने की वासना से उपहित चिदात्मारूप उक्त गाँव
के ब्राह्मण का वह जीवात्मा उसी अपने निवास स्थान में आकाश में इस व्योमरूप महानराष्ट्र
को देखता है