Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 21, Verse 20
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 21, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 21 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
एवमभ्युदिते लोके न किंचिन्न कदाचन ।
क्वचिदभ्युदितं नाम केवलं चिन्नभः स्थितम् ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
चूँकि ब्रह्मा स्वयं कल्पनामय है, अतएव उसका और उसकी सृष्टि का बाध होना युक्ति
युक्त है, इस आशय से कहती है ।
जगत् के इस प्रकार उदित होने पर भी कभी कुछ भी उदित नहीं हुआ, केवल चिदाकाश
ही स्थित है