Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 21, Verse 21
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 21, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 21 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
द्विविधायाः स्मृतेरस्याः कारणं परमं पदम् ।
कार्यकारणभावोऽसावेक एव चिदम्बरे ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
पूर्व अनुभव से उत्पन्न संस्कार से जनित अथवा अनादि अविद्याशक्तिरूप
अन्य वासना से उत्पन्न हिरण्यगर्भ की अथवा अन्य किसीकी स्मृतिरूप इस सृष्टि का कारण
परमपद (मायाशबल ब्रह्म) है । शुद्ध ब्रह्म में तो कार्यकारणभाव आदि भेद की गन्ध भी नहीं है,
ऐसा कहती हैं । चिदाकाश में यह कार्यकारणभाव एक ही हे यानी अभिन्न ही हे । भाव यह कि
शुद्ध चिद् मेँ कार्यकारणभाव की गन्ध भी नहीं हे