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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 21, Verse 22

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 21, verse 22 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 21 · श्लोक 22

संस्कृत श्लोक

कार्य च कारणं चैव कारणैः सहकारिभिः । कार्यकारणयोरैक्यात्तदभावान्न शाम्यति ॥ २२ ॥

हिन्दी अर्थ

कार्य-कारणविकल्प अविचाररूप माया द्वारा किया गया है, विचार करने पर उसका बाध हो जाता है, यह दशनि के लिए विचार करती है। कार्य (पट आदि) ओर कारण (तन्तु आदि) ताना, बाना आदि सहकारी कारणों से होगे, क्योकि उनकी उत्पत्ति मे यदि वे उपकारण न होगे, तो सहकारी कारण ही क्यों कहलायेंगे उपकारक रूप कार्य भी वैसे ही सहकारी कारणों से होगा, इस प्रकार अनवस्था हो जायेगी । उक्त अनवस्था दोषवश उपकार न होने से कार्यकारण भावका बाध होने पर कार्यकारण-कल्पना के अधिष्ठानभूत तन्तु आदि का अभेद शान्त नहीं होता, क्योकि भेद का कारण कोई नहीं हे