Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 21, Verse 51
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 21, verse 51 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 21 · श्लोक 51
संस्कृत श्लोक
सोऽयमेतादृशो देहो नैनं संत्यज्य याम्यहम् ।
अनेनैव तमाप्नोमि देशं गन्धमिवानिलः ॥ ५१ ॥
हिन्दी अर्थ
मेरा यह शरीर इस प्रकार का है, अतएव तुम्हारी नाई इसका
परित्याग करके मैं नहीं जाती हूँ । जैसे वायु गन्ध को प्राप्त होती है वैसे ही इसी देह से मैं
ब्राह्मण-ब्राह्मणी के उस प्रदेश को प्राप्त होऊँगी