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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 21, Verse 62

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 21, verse 62 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 21 · श्लोक 62

संस्कृत श्लोक

परं परे परापूर्णमिदं देहादिकं स्थितम् । इति सत्यं वयं भद्रे पश्यामो नाभिपश्यसि ॥ ६२ ॥

हिन्दी अर्थ

तब आप लोग अपने शरीर को कैसे देखते हैं, यह प्रश्न होने पर देवीजी कहती है । परम ब्रह्म से परिपूर्ण ये देह आदि पांच कोश, जो कि एक एक के अन्दर प्रविष्ट महिमा में स्थित परम ब्रह्म ही हैं, ऐसा हम लोग बिना किसी विघ्नबाधा के देखते हैं । हे भद्रे, तुम एेसा नहीं देखती हो, क्योकि तुम्हें अभी दृढ़ तत्त्वज्ञान नहीं हुआ है