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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 21, Verse 61

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 21, verse 61 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 21 · श्लोक 61

संस्कृत श्लोक

कल्पनापि निवर्तेत कल्पिता यदि केनचित् । सा शिला समपास्तैव या नेहास्ति कदाचन ॥ ६१ ॥

हिन्दी अर्थ

गौड़पादाचार्य ने भी कहा है : विकल्पो विनिवर्तेत कल्पितो यदि केनचित्‌ । उपदेशादयं वादो ज्ञाते द्वैतं न विद्यते ॥ (विकल्प- गुरु, शिष्य, शास्त्र आदि निवृत्त हो जाता है, यदि वह किसी के द्वारा कल्पित हो । जैसे यह प्रपच रज्जू में सर्प के समान भ्रान्ति हे वैसे ही शिष्य आदि भेद विकल्प भी भ्रम ही है, वह ज्ञान प्राप्ति से पहले उपदेश के लिए उपात्त है, उपदेशार्थ यह वाद यानी शिष्य, शासक, शास्त्र आदि होता है, उपदेश के कार्यभूत ज्ञान के उत्पन्न होने के उपरान्त तत्त्व के ज्ञात होने पर द्वैत नहीं रहता)