Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 21, Verse 8

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 21, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 21 · श्लोक 8

संस्कृत श्लोक

कदाचित्स्मृतितां त्यक्त्वा प्रतिभामात्रमेव सत् । भाति प्रथमसर्गेषु रूपेण तदनुक्रमात् ॥ ८ ॥

हिन्दी अर्थ

यदि कोड कहे कि संसार अनादिकाल से चला आ रहा है, इस अनादि संसार में सब कुछ अनुभूत ही है, अतएव यह, जिसमें “स एवायं यः पूर्वमनुभूतः पदार्थः“ जिस पदार्थ का पहले अनुभव किया था, वही यह पदार्थ है) इत्याकारक तत्ता का लोप है, ऐसी स्मृति ही है, भान्ति नहीं है, तो इस पर कहते हैं। कभी प्रजापति की प्रथम सृष्टियों मे स्मृतित्व का त्याग कर केवल अनुभवरूप से ही रहता है, उसके पश्चात्‌ क्रमश: स्मृतिरूप से प्रतीत होता है