Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 21, Verse 9
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 21, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 21 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
दृश्यं त्रिभुवनादीदमनुभूतं स्मृतौ स्थितम् ।
केषांचित्तन्वि केषांचिन्नानुभूतं स्मृतौ स्थितम् ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
पूर्व अनुभूत का ही भान होता है, ऐसा कोई नियम नहीं है, ऐसा कहती है ।
हे सुन्दरी, तीनों भुवन आदि यह दृश्य प्रपंच किन्हीं लोगों की स्मृति में पहले अनुभव
में आरूढ होकर स्थित है और किन्हीं की स्मृति में पूर्व में अनुभव में आरूढ हुए विना ही
स्थित हे