Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 22, Verse 29
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 22, verse 29 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 22 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
दृश्यासंभवबोधेन रागद्वेषादितानवे ।
रतिर्बलोदिता यासौ ब्रह्माभ्यास उदाहृतः ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
दृश्य प्रपंच के असंभव के ज्ञान से राग, द्वेष
आदि का विनाश होने पर मनन से उत्पन्न विद्या की वासना के परिपाक से उत्पन्न हुई जो
आत्मरति (आत्मप्रेम) है, वह ब्रह्माभ्यास हे