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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 24, Verse 7

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 24, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 24 · श्लोक 7

संस्कृत श्लोक

भूतलौघमहाशैलमृणालाङ्कुरकोटिषु । दिक्षु बभ्रमतुः स्वैरं भ्रमर्यौ सरसीष्विव ॥ ७ ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे दो भँवरियाँ करोड़ों मृणालांकुरोंसे व्याप्त कमल के तालाबों में भ्रमण करती हैं, वैसे ही उन्होने भी विविध भूतलों के हिमालय आदि पर्वतरूपी मृणालों के (कमल के पौधे का मूल) करोड़ों अंकुरों से युक्त दिशाओं में भ्रमण किया