Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 26, Verse 56
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 26, verse 56 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 26 · श्लोक 56
संस्कृत श्लोक
हस्तः शिरसि यद्दत्तो लीलया ज्येष्ठशर्मणः ।
तत्प्रभावस्थितारम्भसंबोधायाश्चितेः फलम् ॥ ५६ ॥
हिन्दी अर्थ
यदि लीला का अपने पुत्र आदि पर स्नेह नहीं था, तो उसने उनके सिरपर हाथ कैसे
केरा ? इस शंका पर कहते हैं।
ज्येष्ठशर्मा के सिर पर लीला ने जो हाथ फेरा, वह पुत्रप्रेम का फल नहीं था, किन्तु
ज्येष्ठशर्मा के भावी कल्याण के लिए जिसमें पूर्वजन्म के पुण्य ओर उनका फल तत्त्वज्ञान
स्थित हे, ऐसी सर्वाधिष्ठानभूत चिति का ही विवर्तरूप फल था