Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 27, Verse 57
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 27, verse 57 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 27 · श्लोक 57
संस्कृत श्लोक
गन्धमादनमन्दारमन्दिरे मदनातुरा ।
पातिताः पादयोः पूर्वं विद्याधरकुमारकाः ॥ ५७ ॥
हिन्दी अर्थ
स्थावरयपर्यन्त अधम योनियों में जन्म कहकर अब उत्तम जन्मो को भी कहती है।
पहले मैंने गन्धमादन पर्वत में स्थित मन्दारवृक्षों के निकुंज में कामपीड़ित विद्याधर के
कुमारों को अपने चरणों पर गिराया था, कामपीड़ित विद्याधर कुमारों ने मेरा अनेक प्रकार से
अनुनय विनय किया था