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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 3, Verse 7

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 3, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 3 · श्लोक 7

संस्कृत श्लोक

श्रीराम उवाच । आतिवाहिक एकोऽस्ति देहोऽन्यस्त्वाधिभौतिकः । सर्वासां भूतजातीनां ब्रह्मणोऽस्त्येक एव किम् ॥ ७ ॥

हिन्दी अर्थ

श्रीरामचन्द्रजी ने कहा : भगवन्‌, सम्पूर्ण भूतों के (प्राणियों के) एक आतिवाहिक और दूसरा आधिभौतिक यों दो शरीर हैं, किन्तु ब्रह्मा का केवल आतिवाहिक शरीर ही क्यों है ?