Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 31, Verses 29–30
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 31, verses 29–30 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 31 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
परिपाल्यस्वदेशैकपालने यः स्थितः सदा ।
राजा मृतास्तदर्थं ये ते वीरा वीरलोकिनः ॥ २९ ॥
प्रजोपद्रवनिष्ठस्य राज्ञोऽराज्ञोऽथ वा प्रभोः ।
अर्थेन ये मृता युद्धे ते वै निरयगामिनः ॥ ३० ॥
हिन्दी अर्थ
अवश्य परिपालनीय (रक्षणीय) अपने देश की मुख्यवृत्ति से रक्षण मेँ जो राजा सदा
उद्यमी है, उसकी विजय के लिए जो युद्ध करते हैं वे वीर हैं और उन्हें वीरों का लोक प्राप्त
होता है