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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 34, Verse 33

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 34, verse 33 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 34 · श्लोक 33

संस्कृत श्लोक

छत्रेषूड्डीयमानेषु स्थितेषु व्योम्नि चन्द्रता । इन्दुनेव यशोमूर्त्या कृता शुभ्रातपत्रता ॥ ३३ ॥

हिन्दी अर्थ

उड़ रहे आकाश में स्थित छत्रों ने मानों चन्द्रमा का सम्पादन किया, यशरूप मूर्ति से चन्द्रमा ने भूमि में शुभ्र छातों का सम्पादन किया