Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 34, Verse 35
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 34, verse 35 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 34 · श्लोक 35
संस्कृत श्लोक
शूलशक्त्यृष्टिचक्राणां वृष्टयो मुक्ततुष्टयः ।
व्योमाब्धौ मत्स्यमकरसंकुलावयवाः स्थिताः ॥ ३५ ॥
हिन्दी अर्थ
आकाशरूपी सागर
मेँ त्रिशूल, शक्ति, तलवार ओर चक्रों की व्यग्र वृष्टियाँ मछलियों ओर मगरो से व्याप्त-सी
स्थित हुई