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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 34, Verse 39

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 34, verse 39 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 34 · श्लोक 39

संस्कृत श्लोक

वहद्भिर्व्योम्नि सक्षेम पश्य नीता क्षयं शरै । शक्तिवृष्टिरुपायान्ती सस्यश्रीः शलभैरिव ॥ ३९ ॥

हिन्दी अर्थ

हे कुशलिन्‌, जैसे फलने के लिए तैयार धानो की शोभा को आकाशमें उड़ रहे टिड्डियों का दल नष्ट कर देता है, वैसे ही समीप में आ रही शक्तियों की वर्षा आकाश में उड़ रहे बाणो से नष्ट की गई है, देखो