Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 34, Verse 4
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 34, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 34 · श्लोक 4
संस्कृत श्लोक
किमिदं भगवन्व्योम पलालभरितं स्थितम् ।
नेदं पलालं वीराणामेते शरभराम्बुदाः ॥ ४ ॥
हिन्दी अर्थ
कोई दर्शक दूर से बाणसमुदाय पराल की भांति होने से पूछता है ।
भगवन्, यह आकाश परालराशि से परिपूर्ण हुआ है क्या ? नहीं, भगवन यह पराल नहीं
है, ये वीर पुष्षों के बाणराशिरूप मेघ हैं