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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 34, Verse 3

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 34, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 34 · श्लोक 3

संस्कृत श्लोक

पश्य रक्तपृषत्पूरसिन्दूरारुणमारुतैः । सांध्या इव विभान्त्येते मध्याह्नेऽम्बुदभानवः ॥ ३ ॥

हिन्दी अर्थ

देखिये, रुधिरबिन्दुओं की राशिरूपी सिन्दूर से लाल हुए वायु के कारण ये मेघ और सूर्य किरण मध्याह्न में सायंकाल के से (लाल से) प्रतीत होते हैं