Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 34, Verse 41
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 34, verse 41 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 34 · श्लोक 41
संस्कृत श्लोक
हेतिकल्पानिलक्षुण्णा दन्तनिर्झरवारयः ।
जनताक्षयकालेऽस्मिन्भग्ना नागा नगा इव ॥ ४१ ॥
हिन्दी अर्थ
इस
जनक्षय के अवसर मेँ तलवार आदि अस्त्र-शस्त्र रूपी प्रलयकाल के वायु से परास्त, दाँतरूपी
झरने के जल से युक्त (रनों की नाई दाँत बाहर निकले रहते हैं और सफेद होते हैं अतः
रनों के साथ दाँतों की तुलना की गई है) घायल हाथी ही पर्वतो की तरह प्रतीत होते
हैं