Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 34, Verse 44
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 34, verse 44 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 34 · श्लोक 44
संस्कृत श्लोक
नरेभखरवाजिभ्यो ये च्युता रक्तनिर्झराः ।
पश्य तद्बिन्दुसिक्तेन वायुनारुणिता दिशः ॥ ४४ ॥
हिन्दी अर्थ
मनुष्य, हाथी, घोडे
ओर गदहों से जो खून के झरने निकले उनके विन्दुओं से सराबोर वायु से लाल हुई दिशाओं
को देखो