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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 34, Verses 8–9

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 34, verses 8–9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 34 · श्लोक 8 ,9

संस्कृत श्लोक

लसद्भुजलतालोला रक्तपल्लवपाणयः । मञ्जरीमत्तनयना मध्वामोदसुगन्धयः ॥ ८ ॥ गायन्त्यो मधुरालापैर्नन्दनोद्यानदेवताः । तवागमनमाशङ्क्य प्रवृत्ताः परिनर्तितुम् ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

सुन्दर भुजलताओं से मनोहर, लाल पल्लवो के सदृश कोमल हाथों से युक्त, पारिजात आदि, पुष्पमंजरियों के दर्शन से जिनके नेत्र आह्लादित हैँ, आसव की अत्यन्त सुगन्धि से सुगन्धित, मधुर सुर से गा रही नन्दनवन की देवियाँ तुम्हारे आगमन की आशंका से नाचने के लिए तत्पर हो गई हैं