Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 35, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 35, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 35 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
कष्टटाङ्कारकोदण्डकुण्डलोन्मथनोद्भटः ।
अशङ्कमेव पातालादिवोद्यत्सैनिकोर्मिमान् ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
क्लेशकारक टंकारवाले धनुषरूपी सर्पो के छेदन में
योद्धा तत्पर थे, निशंक होकर पाताल से मानों निकल रहे सैनिकरूपी लहरों से युक्त
था