Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 35, Verse 12
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 35, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 35 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
गमागमपरानन्तपताकाच्छत्रफेनिलः ।
वहद्रक्तनदीरंहःप्रोह्यमानरथद्रुमः ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
गमन और आगमन में तत्पर अनन्त पताका और छत्र ही उसमें फेन थे, बह रही
रुधिर की नदी के वेग में रथरूपी वृक्ष बहाये जा रहे थे