Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 35, Verse 26
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 35, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 35 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
शरधाराघनानीकमेघच्छन्नमहीनभाः ।
महानीकार्णवक्षोभसंघट्टघटिताद्रवः ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
सेनिकरूपी मेघो
ने निबिड बाणवृष्टिरूपी वर्षा से महीतल ओर आकाशमण्डल को आच्छन्न कर दिया था,
क्रमशः महासेनारूपी सागर के संक्षोभ से (क्रोध से) उत्पन्न संघ से चारों ओर पलायन
होने लगा