Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 35, Verse 27
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 35, verse 27 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 35 · श्लोक 27
संस्कृत श्लोक
व्याप्त उग्रानिलोद्भूतैर्जलव्यालैरिवाचलः ।
अन्योन्यदलनव्यग्रैः शस्त्रोत्पात इवोत्थितैः ॥ २७ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे उग्र झंझावात से उड़ाये गये जल के साँपों से समूद्र के गर्भ में स्थित
पर्वत व्याप्त होता है, वैसे ही परस्पर एक दूसरे को काटने में व्यग्र, मानों शस्त्र बरसानेवाले
प्रलयोत्पात में उत्पन्न हुए शस्त्रो से रणभूमि व्याप्त थी