Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 36, Verses 22–29

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 36, verses 22–29 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 36 · श्लोक 22-29

संस्कृत श्लोक

पूर्वस्यां कोसलाः काशिमागधा मिथिलोत्कलाः । मेखलाः कर्करा मुद्रास्तथा संग्रामशौण्डकाः ॥ २२ ॥ मुख्या हिमा रुद्रमुख्यास्ताम्रलिप्तास्तथैव च । प्राग्ज्योतिषा वाजिमुखा अम्बष्ठाः पुरुषादकाः ॥ २३ ॥ वर्णकोष्ठाः सविश्वोत्रा आममीनाशनास्तथा । व्याघ्रवक्राः किराताश्च सौवीरा एकपादकाः ॥ २४ ॥ माल्यवान्नाम शैलोऽत्र शिविराञ्जन एव च । वृषलध्वजपद्माद्यास्तथोदयकरोगिरिः ॥ २५ ॥ अथ प्राग्दक्षिणायां तु इमे विन्ध्यादिवासिनः । चेदयो वत्सदाशार्णा अङ्गवङ्गोपवङ्गकाः ॥ २६ ॥ कलिङ्गपुण्ड्रजठरा विदर्भा मेखलास्तथा । शबराननवर्णाश्च कर्णात्रिपुरपूरकाः ॥ २७ ॥ कण्टकस्थलनामानः पृथग्दीपककोमलाः । कर्णान्ध्राश्चौलिकाश्चैव तथा चार्मण्वता अपि ॥ २८ ॥ काकका हेमकुड्याश्च तथा श्मश्रुधरा अपि । बलिग्रीवमहाग्रीवाः किष्किन्धा नालिकेरिणः ॥ २९ ॥

हिन्दी अर्थ

अब विदूरथ और सिन्धुराज के सहायक लोगों का पूर्व आदि दिशाओं के भेद से क्रमशः वर्णन करने की श्रीवस्रिष्ठजी प्रतिज्ञा करते हैं । श्रीवसिष्ठजी ने कहा : श्रीरामजी, मध्यदेश आदि की गणना में पूर्व दिशा से लीला के स्वामी महाराज पद्म की सहायता के लिए आये हुए नीचे कहे जानेवाले देशों के अधिपतियों को मैं आपसे कहता हूँ, आप सुनिये ॥ २ १॥ पूर्व दिशा के कोशल, काशी, मगध, मिथिला, उत्कल, मेखल, कर्कर, मुद्र, संग्रामशौण्डक, मुख्य, हिम, रुद्रमुख्य, ताम्रलिप्त, प्राग्‌ज्योतिष, अश्वमुख, अम्बष्ठ, पुरुषादक, वर्णकोष्ठ, सविश्वोत्र, कच्ची मछली खानेवाले, व्याघ्र सदृश मुखवाले, किरात सौवीर और एकपादक इन चौबीस देशों के सहायक आएऐ थे । माल्यवान्‌ नामक पर्वत, शिवि, आंजन, वृषल, ध्वज, पद्म तथा उदय पर्वत इस सात पर्वतो के सहायक आये | पूर्व-दक्षिण दिशा से लीला के पति पद्म के विन्ध्य पर्वत के पूर्वभाग के देश, चेदि, वत्स, दाशार्ण, अंग, बंग, उपबंग, कलिंग, पुण्ड, जठर, विदर्भ, मेकल, शवरानन, शवरवर्ण, कर्ण, त्रिपुर, पूरक, कण्टकस्थ, पृग्दीपक, कोमल कर्णान्ध्र, चौलिक, चर्मण्वती के निकटवर्ती, काकक, हेमकुड्य, श्मश्रुधर, बलिग्रीव, महाग्रीव, किष्किन्धा ओर नारिकेली इन सत्ताईस देशों और चार पर्वतो के निवासी वीरगण सहायक थे