Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 36, Verses 44–45
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 36, verses 44–45 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 36 · श्लोक 44,45
संस्कृत श्लोक
अथ तत्प्रतिपक्षस्थानिमाञ्जनपदाञ्श्रृणु ।
पश्चिमायां दिशि प्रौढा इमे तावन्महाद्रयः ॥ ४४ ॥
मणिमान्नाम शैलेन्द्रः कुरार्पणगिरिस्तथा ।
वनोऽर्कहो मेघभवश्चक्रवानस्तपर्वतः ॥ ४५ ॥
हिन्दी अर्थ
अब हे
श्रीरामचन्द्रजी, लीला के पति के विपक्ष में स्थित वीरो ओर उनके देशों को मैं आपसे कहता
ह, सुनिये । पश्चिम दिशा में ये बड़े-बड़े पर्वत हैं - मणिमान्, शैलेन्द्र, कुरापर्णगिरि, बन,
अर्कह , मेघफल, चक्रवान् ओर अस्ताचल