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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 36, Verse 51

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 36, verse 51 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 36 · श्लोक 51

संस्कृत श्लोक

पश्चिमोत्तरदिग्भागे देशो गिरिमति स्थितः । तथा वेणुपतिश्चैव ततो नरपतिर्मही ॥ ५१ ॥

हिन्दी अर्थ

पश्चिम ओर उत्तर दिशा के अन्तराल भाग में, जो पर्वतप्राय है, वेणुपति ओर नरपति देश है, जहाँ नित्य उत्सव हुआ करते हैँ