Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 36, Verse 9
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 36, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 36 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
सरच्छरभरासाररचितापूर्ववारिदम् ।
युयुधे स्थगिताकाशा धनुर्धरपताकिनी ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
जिसने बाणों से आकाश पाट दिया है
ऐसे धनुर्धरों की सेना से सरसराते हुए असंख्य बाणों की मूसलाधार वृष्टिसे अद्भुत मेघों का
निर्माण करते हुए युद्ध किया