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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 36, Verse 8

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 36, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 36 · श्लोक 8

संस्कृत श्लोक

रथौघश्च रथौघेन निष्पिपेषाखिलं वपुः । नगरं नगरेणेव दैवेनोड्डीनमासुरम् ॥ ८ ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे उड़ा हुआ असुरनगर देवनगर से अपने अंग-प्रत्यंगों को चूरचूर करे, वैसे ही रथों के समूह ने रथों के समूह से अपने अंग-प्रत्यंगों को खूब चूरचूर किया