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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 37, Verse 16

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 37, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 37 · श्लोक 16

संस्कृत श्लोक

कर्णाटसुभटोड्डीनकुन्ताकलितकन्धराः । भग्ना नलदशूराश्च तारकानिकरा इव ॥ १६ ॥

हिन्दी अर्थ

कर्णाट देश के दक्ष योद्धाओं द्वारा वायु में फेंके गये भालों से जिनके कन्धे कट गये थे, ऐसे नलददेश के शूर तारों के समूह की नाई विशीर्ण हो गये