Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 37, Verse 17
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 37, verse 17 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 37 · श्लोक 17
संस्कृत श्लोक
करीन्द्रमकरव्यूहरंहःसंहतहेतयः ।
केशाकेशिकृतारम्भा विनेदुर्दाशकाः शकाः ॥ १७ ॥
हिन्दी अर्थ
मगरो के समूह के सदुश गजराजो ने जिनके शस्त्रास्त्र बडे वेग से छिन्न भिन्न कर दिये थे, ऐसे
दाशक ओर शक केशाकेशि युद्ध के लिए (एक दूसरे का झोटा पकड़ कर जो युद्ध होता है उसे
केशाकेशि युद्ध कहते हैं) सन्नद्ध होकर सिंहनाद करते थे