Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 37, Verse 35
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 37, verse 35 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 37 · श्लोक 35
संस्कृत श्लोक
धराधरणधर्मिण्या धीरया हीनसेनया ।
लुण्ठिताः पाण्डुनगराश्चलनोल्लासमात्रतः ॥ ३५ ॥
हिन्दी अर्थ
धरा पर यानी युद्धभूमि पर आक्रमण करनेवाली धीरप्रकृति अहीनदेश की
सेना ने अपने सोल्लास गमन से ही पाण्डुनगर के वीरगणों को लुण्ठित कर दिया