Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 37, Verse 36
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 37, verse 36 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 37 · श्लोक 36
संस्कृत श्लोक
त देहकाः पाञ्चनदैर्दलिता मत्तकाशिभिः ।
कुन्तदन्तद्रुमोद्दामा नगा इव मतङ्गजैः ॥ ३६ ॥
हिन्दी अर्थ
मदोन्मत्त की नाई चलनेवाले पंचनददेश के वीरों ने तद्देहकवासी योद्धाओं को, जो भालों,
हाथी के दाँतों और वृक्षरूपी हथियारों से युद्ध करनें में कुशल थे, जैसे हाथी पर्वतों को खोद
डालते हैं वैसे ही कतल कर दिया