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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 37, Verse 56

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 37, verse 56 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 37 · श्लोक 56

संस्कृत श्लोक

द्विपयो बाहुधानानां क्षणेनादाय मस्तकम् । भल्लैः पलाय्याशु गता विलूनकमला इव ॥ ५६ ॥

हिन्दी अर्थ

द्विपिदेश के योद्धा, जिन्होंने कमल तोड़े हैं उन पुरुषों की नाई, अपने भालों से बाहुधानदेश के योद्धाओं के मस्तक को एक क्षण में लेकर (काट कर) भागकर तुरन्त चले गये